
*पूर्वांचल महोत्सव-माटी’ के नौवें संस्करण का पटना में आयोजन, कला-संस्कृति और परंपराओं का दिखा संगम*
*पूर्वांचल की लोकसंस्कृति और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का मंच बना ‘माटी’
*मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली सात हस्तियों को किया सम्मानित
*पूर्वांचल की माटी, संस्कृति और परंपरा हमारी समृद्ध पहचान : संजय सरावगी
*अपनी जड़ों से जुड़कर ही मजबूत होगा सांस्कृतिक और सामाजिक सरोकार : संजय सरावगी
*माटी से जुड़ाव ही हमारी पहचान, संस्कृति और विरासत का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी : विजय कुमार सिन्हा
*पूर्वांचल के पारंपरिक व्यंजन, लोकगीत, संगीत और कला ने मोहा लोगों का मन
पटना, 19 सितंबर । पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आज ‘पूर्वांचल महोत्सव-माटी’ के नौवें संस्करण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किया। इस अवसर पर पूर्वांचल की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं, खान-पान, कला और संगीत की विविध झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली नौ हस्तियों को ‘माटी सम्मान’ से सम्मानित किया।
कार्यक्रम में ‘माटी’ के राष्ट्रीय संयोजक आसिफ आजमी, बिहार संयोजक दानिश इकबाल, सांसद जगदम्बिका पाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान पूर्वांचल के पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए, जहां लोगों ने विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का स्वाद लिया। लोकगीत, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पूर्वांचल की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को प्रस्तुत किया गया। प्रसिद्ध लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने भी अपनी प्रस्तुति दी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस अवसर पर सैयद सबा करीम, कोच एवं पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी; श्वेता सिंह, वरिष्ठ प्रबंध संपादक, आजतक, ब्रजेश कुमार सिंह, प्रबंध निदेशक एवं सीईओ, केनरा बैंक, न्यायमूर्ति अरुण कुमार, पूर्व न्यायाधीश, पटना उच्च न्यायालय, डॉ. राजीव रंजन, वरिष्ठ चिकित्सक एवं पूर्व सदस्य, एमसीआई; शशांक कुमार, सह-संस्थापक एवं सीईओ, ‘देहात’; तथा मधु कुमारी, कोच एवं भारतीय फुटबॉल टीम की पूर्व उपकप्तान को सम्मानित किया।
इस अवसर पर संजय सरावगी ने कहा कि पूर्वांचल की पहचान उसकी मिट्टी, लोकपरंपराओं, भाषा, कला और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी विरासत से परिचित कराने के साथ-साथ कलाकारों, प्रतिभाओं और लोक परंपराओं को प्रोत्साहित करना भी जरूरी है।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि ‘माटी’ केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि पूर्वांचल की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और अपनी जड़ों से जुड़े गौरव को सहेजने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सुंदर प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में पूर्वांचल के पारंपरिक व्यंजन, लोकगीत-संगीत, मिलना-मिलाना, परिचर्चा और ‘माटी सम्मान’ सहित संस्कृति और परंपरा से जुड़े अनेक रंग देखने को मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि माटी से जुड़ाव ही हमारी पहचान है और अपनी संस्कृति, परंपराओं एवं विरासत का संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और परिचर्चाओं के माध्यम से पूर्वांचल की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता को सामने रखा गया।



