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जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने हाजीपुर में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि वो उन्हें बिहार के अब तक के 10 सर्वश्रेष्ठ नेताओं में से एक मानते हैं।

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने हाजीपुर में जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए कहा कि वो उन्हें बिहार के अब तक के 10 सर्वश्रेष्ठ नेताओं में से एक मानते हैं।

बांकीपुर से विधायक किशोर ने यह भी कहा कि वह इस बात के खिलाफ हैं कि 70 वर्ष से अधिक उम्र के नीतीश कुमार की बिगड़ती मानसिक सेहत के बावजूद वह सत्ता में बने रहें और सरकार परोक्ष रूप से दूसरे लोगों के हाथ में रहे। प्रशांत किशोर आगामी विधान परिषद चुनाव के प्रचार के लिए वैशाली जिले में थे। पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कई वर्षों से जानने के आधार पर क्या उन्हें लगता है कि नीतीश कुमार अपने विरोधियों की ‘हत्या का आदेश’ दे सकते हैं। इसके जवाब में उन्होंने यह बात कही।

अनंत सिंह ‘नौ हत्याओं’ वाले बयान पर पीके का स्टेटमेंट

दरअसल, मोकामा से विधायक अनंत कुमार सिंह की एक टिप्पणी के संदर्भ में यह सवाल किया गया था। हालांकि अपने बयान से पलटते हुए अनंत सिंह ने दावा किया कि जिन ‘नौ हत्याओं’ का उन्होंने जिक्र किया था, वे उनके परिवार के उन सदस्यों की थीं, जिनकी हत्या इसलिए कर दी गई क्योंकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकाल में भी वो जदयू प्रमुख नीतीश कुमार के करीबी थे। प्रशांत किशोर ने कहा, ‘अनंत सिंह जदयू से हैं, जो सरकार का हिस्सा है। राजद मुख्य विपक्षी दल है। इस मामले को दोनों दलों को आपस में सुलझाना चाहिए।’

‘बिहार के 10 सर्वश्रेष्ठ नेताओं में नीतीश की गिनती होगी’

उन्होंने कहा कि अगर दोनों दल उचित समझें तो इस मामले की जांच करा सकते हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज पार्टी का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। प्रशांत किशोर ने कहा, ‘जहां तक नीतीश कुमार की बात है, मैं उन्हें बिहार के सबसे समझदार नेताओं में से एक मानता हूं। राज्य के अब तक के 10 सर्वश्रेष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होगी। मैंने उनका विरोध तब किया था, जब खराब मानसिक स्वास्थ्य के बावजूद उन्हें सत्ता में बनाए रखा जा रहा था और सरकार परोक्ष रूप से दूसरे लोग चला रहे थे।’ प्रशांत किशोर ने कहा, ‘इसके बावजूद इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि नीतीश कुमार को ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने बिहार में हालात सुधारने की कोशिश की।’

प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार के संबंध कैसे रहे?

प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार के संबंध उतार-चढ़ाव भरे और रणनीतिक रहे हैं। 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर (PK) ने चुनावी रणनीतिकार के रूप में जेडीयू (JDU) के प्रचार की कमान संभाली और ‘महागठबंधन’ की जीत में अहम भूमिका निभाई। इस सफलता के बाद नीतीश कुमार ने उन्हें अपना नीति सलाहकार बनाया और 2018 में जेडीयू में शामिल कर पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया। एक समय में अपना उत्तराधिकारी तक बताया।

हालांकि, ये निकटता ज्यादा समय तक नहीं टिकी। 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) के मुद्दे पर दोनों के बीच गहरे मतभेद सामने आए। पीके ने खुले तौर पर पार्टी लाइन के खिलाफ रुख अपनाने के बाद, जनवरी 2020 में नीतीश कुमार ने उन्हें जेडीयू से निष्कासित कर दिया। इसके बाद प्रशांत किशोर ने ‘जन सुराज’ अभियान की शुरुआत कर नीतीश सरकार और उनकी नीतियों पर तीखे हमले बोलने शुरू कर दिए। कभी बेहद करीबी सहयोगी रहे दोनों नेता आज एक-दूसरे के कड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं।

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