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शराबबंदी से महिला सशक्तीकरण तक, नीतीश कुमार के साहसिक फैसलों ने लायी सामाजिक क्रांति – डा0 अनुप्रिया यादव
20 फरवरी 2026, पटना।
जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता डा0 अनुप्रिया यादव ने सोशल मीडिया संवाद करते हुए कहा कि बिहार में पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय में जो सामाजिक परिवर्तन दिखाई दे रहा है, वह केवल नीतियों का परिणाम नहीं बल्कि दूरदर्शी नेतृत्व और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रमाण है। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने सत्ता को साधन और समाज सुधार को लक्ष्य मानते हुए विकास की एक नई परिभाषा गढ़ी है।
मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने हमेशा स्पष्ट कहा है कि सत्ता का अर्थ केवल प्रशासन चलाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। इसी सोच के साथ वर्ष 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू कर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह कदम किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि बिहार की महिलाओं की वर्षों पुरानी मांग पर उठाया गया था। शराबबंदी लागू होने के बाद घरेलू हिंसा में कमी आई, परिवारों की आय घर के विकास में लगने लगी, बच्चों की शिक्षा और पोषण पर व्यय बढ़ा तथा सामाजिक वातावरण अधिक सुरक्षित हुआ। मजदूर वर्ग और कमजोर तबके को सीधा लाभ मिला तथा समाज में महिलाओं के सम्मान और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
इसी क्रम में दहेज प्रथा और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध राज्यव्यापी अभियान चलाया गया। मानव शृंखला के माध्यम से करोड़ों लोगों ने इन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संकल्प लिया। स्कूलों और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए गए, कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की गई और बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएँ लागू की गईं। आज बिहार में लड़कियों की विद्यालय उपस्थिति में वृद्धि हुई है, वे उच्च शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, और समाज में दहेज के खिलाफ खुलकर आवाज उठ रही है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए जीविका कार्यक्रम को सशक्त आधार प्रदान किया गया। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया गया। करोड़ों महिलाओं को इससे लाभ मिला है, हजारों करोड़ रुपये की राशि सीधे उनके खातों में हस्तांतरित की गई है, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। बैंक सखी, पशु सखी, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों के माध्यम से महिलाएँ आज आर्थिक गतिविधियों की धुरी बन चुकी हैं।
आज बिहार की महिलाएँ केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि परिवर्तन की अग्रदूत हैं। वे पंचायत चला रही हैं, स्वयं सहायता समूहों का नेतृत्व कर रही हैं, उद्यमिता की मिसाल बन रही हैं और सामाजिक चेतना की नई धारा प्रवाहित कर रही हैं।
सामाजिक न्याय और विकास का वास्तविक अर्थ तभी है जब समाज के हर वर्ग-विशेषकर महिलाओं और बेटियों-को समान अवसर और सम्मान मिले। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने यह सिद्ध किया है कि यदि नीयत साफ हो और संकल्प मजबूत हो, तो गहरे सामाजिक परिवर्तन संभव हैं।
(अशोक कुमार)
कार्यालय सचिव



