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राज्यसभा चुनाव में संभावित हार के डर से आरजेडी ने अपने विधायकों को कैद किया – मनीष यादव

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राज्यसभा चुनाव में संभावित हार के डर से आरजेडी ने अपने विधायकों को कैद किया – मनीष यादव

15 मार्च 2026, पटना।

जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता श्री मनीष यादव ने आरजेडी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनता दल में मची घबराहट अब खुलकर सामने आ गई है। जिस पार्टी के नेता दिन-रात लोकतंत्र, संविधान और जनादेश की दुहाई देते नहीं थकते, वही आज अपने ही विधायकों को होटल में बंद कर पहरेदारी कर रही है।

तेजस्वी यादव द्वारा अपने विधायकों को होटल में ‘‘सुरक्षित’’ रखने का नाटक दरअसल उनकी गहरी राजनीतिक असुरक्षा, अंदरूनी अविश्वास और तयशुदा हार की स्वीकारोक्ति है। सच तो यह है कि जब नेतृत्व पर भरोसा खत्म हो जाता है, तब विधायक होटल में नहीं, नजरबंदी में रखे जाते हैं। आरजेडी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उन्हें अपने विधायकों की निष्ठा से ज्यादा डर अपनी हार का है।

यह बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को स्वतंत्र सोच और निर्णय का सम्मान देने के बजाय उन्हें ऐसे बंद कमरों में कैद करके रखा जा रहा है, मानो वे विधायक नहीं बल्कि राजनीतिक बंधक हों। इससे बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है कि आरजेडी को अपने ही घर के लोगों पर भरोसा नहीं रहा। जो पार्टी अपने विधायकों पर भरोसा नहीं कर सकती, वह बिहार की जनता का भरोसा क्या संभालेगी?

आरजेडी का यह पुराना राजनीतिक चरित्र रहा है – जब भी हार सामने दिखती है, तो सिद्धांत, नैतिकता और लोकतंत्र सबसे पहले कमरे के बाहर छोड़ दिए जाते हैं। चुनाव आते ही विधायकों की गिनती शुरू होती है, और हार दिखते ही होटल बुक हो जाते हैं। यह लोकतंत्र नहीं, ‘‘होटलतंत्र’’ है। यह राजनीतिक रणनीति नहीं, हार के डर से उपजी घबराहट का सार्वजनिक प्रदर्शन है।

राज्यसभा चुनाव में एनडीए की जीत सुनिश्चित है और आरजेडी की बेचैनी उसी का प्रत्यक्ष प्रमाण है। तेजस्वी यादव को समझ लेना चाहिए कि विधायकों को होटल में बंद करने से जनादेश नहीं बदलता, गणित नहीं बदलता और राजनीतिक सच्चाई भी नहीं बदलती। बिहार सब देख रहा है कौन लोकतंत्र में विश्वास करता है और कौन अपने ही विधायकों को शक की नजर से देखता है।

(संजय कुमार सिन्हा)

कार्यालय सचिव

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