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किताबों में नहीं, नीतीश कुमार का ‘सशक्त बिहार’ आज सड़कों पर दिखता और धड़कनों में गूंजता है – अंजुम आरा

प्रकाशनार्थ/प्रसारणार्थ

किताबों में नहीं, नीतीश कुमार का ‘सशक्त बिहार’ आज सड़कों पर दिखता और धड़कनों में गूंजता है – अंजुम आरा

पटना 11 अप्रैल 2026।

जद (यू0) प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती अंजुम आरा ने जारी बयान में कहा कि बिहार ने एक ऐसे नेतृत्व को करीब से देखा है, जिसने केवल शासन नहीं किया, बल्कि राज्य की पहचान को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का 20 वर्षों का सार्वजनिक जीवन केवल सत्ता का अध्याय नहीं, बल्कि संघर्ष, संकल्प और व्यापक सामाजिक बदलाव की एक प्रेरक गाथा है।

एक समय था जब बिहार को ‘जंगल राज’ कहकर उपहास का विषय बनाया जाता था। आज वही बिहार विकास, सुशासन और आत्मसम्मान की मिसाल बनकर देश के सामने मजबूती से खड़ा है। यह बदलाव अचानक नहीं आया-इसके पीछे वर्षों की दूरदृष्टि, नीति-निर्माण की स्पष्टता और जनसेवा के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता रही है।

सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और कानून-व्यवस्थाकृहर क्षेत्र में व्यापक सुधार हुए हैं। यह परिवर्तन केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम लोगों के दैनिक जीवन में स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता है। गांव-गांव तक पहुंची बिजली, बेहतर सड़क संपर्क, स्कूलों में बढ़ती उपस्थिति और विशेष रूप से बेटियों के सशक्तिकरण के लिए साइकिल एवं महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से जीविका जैसी योजनाएं-ये सभी उस सोच का परिणाम हैं, जो समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है।

इसके साथ ही, सामाजिक न्याय और समरसता की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। जहां कभी जातीय तनाव और हिंसा की घटनाएं चिंता का विषय थीं, वहीं आज बिहार सामाजिक सौहार्द और सहयोग की नई पहचान बना रहा है। नक्सलवाद के प्रभाव वाले क्षेत्रों में शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ना, इस परिवर्तन की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि यह सब मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की दृढ़ इच्छाशक्ति, पारदर्शी शासन और जनहित के प्रति अटूट समर्पण का परिणाम है। उनका नेतृत्व इस बात का प्रमाण है कि यदि नीयत साफ हो और नीति मजबूत, तो किसी भी राज्य की तस्वीर बदली जा सकती है।

आज बिहार केवल अपने अतीत से बाहर नहीं निकला है, बल्कि भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ बढ़ रहा है। यह बदलाव हर बिहारवासियों के आत्मसम्मान, विश्वास और उम्मीदों में झलकता है।

(संजय कुमार सिन्हा)

कार्यालय सचिव

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