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विपक्ष का टूटा भ्रमजाल, बिहार में रिकाॅर्ड रोजगार, घटती गरीबी और बढ़ता उद्योग – डाॅ0 निहोरा प्रसाद यादव

 

विपक्ष का टूटा भ्रमजाल, बिहार में रिकाॅर्ड रोजगार, घटती गरीबी और बढ़ता उद्योग – डाॅ0 निहोरा प्रसाद यादव

10 दिसम्बर 2025

जद (यू0) प्रदेश प्रवक्ता डाॅ0 निहोरा प्रसाद यादव ने सोशल संवाद करते हुए कहा कि बिहार की जनता ने वर्ष 2025 के लिए जो प्रचंड जनादेश देकर पुनः मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनायी है, उसके लिए हम हृदय से धन्यवाद एवं आभार प्रकट करते हैं। यह जनादेश बिहार की विकास यात्रा पर जनता के विश्वास का प्रतीक है।

चुनाव अभियान में विपक्ष ने चार प्रमुख मुद्दों-पलायन, बेरोजगारी, गरीबी और उद्योग-को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया। जातीय सर्वेक्षण के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार बिहार से लगभग 54 लाख लोग राज्य के बाहर रहते हैं, जिनमें से करीब 45 लाख लोग बाहर कार्यरत हैं। इसके विपरीत विपक्ष द्वारा 2 करोड़ 9 लाख के पलायन का झूठा दावा किया गया, जो केवल ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत उन नामों का आंकड़ा था, जिनमें बड़ी संख्या में वे लोग भी शामिल हैं जो बिहार में ही रहकर काम करते हैं।

बेरोजगारी को लेकर भी विपक्ष ने भ्रामक बयानबाजी की, जबकि सच्चाई यह है कि बिहार में लगातार रोजगार के अवसर बढ़े हैं। सरकार के वादे से भी आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी ने 10 लाख लोगों को सरकारी नौकरी और 40 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है-कुल 50 लाख से अधिक अवसर, जो अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि है। इससे राज्य में बेरोजगारी दर में स्पष्ट गिरावट आई है और नए आंकड़ों में यह और कम दिखाई देगा।

गरीबी को लेकर भी विपक्ष ने आरोप लगाए, जबकि सामाजिक-आर्थिक स्थिति के सूचकांकों के मुताबिक बिहार में गरीबी में भारी कमी आई है। वर्ष 2005 में जहाँ गरीबी 54.40% थी, वहीं लगातार किए गए विकास कार्यों के परिणामस्वरूप यह घटकर 33.76% रह गई है। यह आंकड़ा मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार के दूरदर्शी नेतृत्व का प्रमाण है।

उद्योगधंधों को लेकर विपक्ष द्वारा यह कहना कि बिहार में ‘एक भी उद्योग नहीं लगा’, पूर्णतः असत्य है। जहाँ पहले बिहार में महज 46 बड़े उद्योग थे, वहीं 2025 तक इनकी संख्या बढ़कर 94 हो चुकी है। औद्योगिक इकाइयाँ 1,674 से बढ़कर 3,500 से अधिक हो गई हैं और लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों में तो अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। आर्थिक वृद्धि के सूचकांक भी बिहार की मजबूती का परिचय देते हैं। जहाँ राज्य की आर्थिक वृद्धि दर पहले 7.78% थी, वह बढ़कर 13.09% हो गई है। कृषि विकास दर, जो 2005 से पहले नकारात्मक थी, आज बढ़कर 9.45% हो चुकी है। यह कृषि रोडमैप और राज्य सरकार की सतत नीतियों का सीधा परिणाम है। बिजली, सड़क और सुरक्षा-ये तीनों आधारभूत स्तंभ आज बिहार में मजबूत होकर उद्योगों के लिए सर्वोत्तम माहौल तैयार कर रहे हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 2025 से 2030 तक का कालखंड मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार द्वारा बिहार के तीव्र औद्योगीकरण का काल घोषित किया गया है। 100 करोड़ से अधिक निवेश करने वाले उद्योगों को 25 करोड़ रुपये की भूमि अनुदान और अन्य प्रोत्साहन दिए जाएंगे, बशर्ते वे बिहार के युवाओं को रोजगार देंगे। इस अवधि में लाखों रोजगार पैदा होने वाले हैं और बिहार निवेशकों के लिए नया केंद्र बनने जा रहा है।

बिहार आज उन राज्यों की श्रेणी में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जो देश के शीर्ष दस आर्थिक रूप से उन्नत राज्यों में गिने जाते हैं। जैसे-जैसे रोजगार और उद्योग बढ़ेंगे, गरीबी और पलायन स्वतः घटेंगे और जो 45 लाख लोग आज बाहर काम कर रहे हैं, वे अपने राज्य लौटने लगेंगे-जिसकी शुरुआत पहले ही हो चुकी है

(संजय कुमार सिन्हा)

कार्यालय सचिव

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