राजद सांसद संजय यादव ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि वंचित वर्गों के लाखों लोगों के लिए “सामाजिक न्याय” आज भी एक सपना है। आज शोषक और शोषित, शासक और शासित दोनों ही सामाजिक न्याय की भाषा का प्रयोग करते हैं। शासक सामाजिक न्याय की बातें अपने विशेषाधिकारों की रक्षा के लिए करते हैं, न कि सबसे वंचित वर्गों के उत्थान के लिए।

प्रेस विज्ञप्ति
राजद सांसद संजय यादव ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि वंचित वर्गों के लाखों लोगों के लिए “सामाजिक न्याय” आज भी एक सपना है। आज शोषक और शोषित, शासक और शासित दोनों ही सामाजिक न्याय की भाषा का प्रयोग करते हैं। शासक सामाजिक न्याय की बातें अपने विशेषाधिकारों की रक्षा के लिए करते हैं, न कि सबसे वंचित वर्गों के उत्थान के लिए।
पिछड़े और हाशिए पर रहने वाले लोग—आज भी पहुँच, सम्मान और अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
OBC for this govt has become “Only Bhashan Content”. OBC की मौजूदगी भाषणों में तो खूब बढ़ाई गई, लेकिन हक़ और अधिकार के पटल पर उससे दोगुनी घटाई गई। इस सरकार की नीति और व्यवहार में भारी अंतर है। कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क है।
आज के भारत में एक नई राजनीति चल रही है। नाम सामाजिक न्याय का, काम सामाजिक अन्याय का।
पोस्टर में OBC
प्रचार में OBC
लेकिन नीति, नियुक्ति और निर्णय
तीनों से OBC ग़ायब।
संजय यादव ने कहा कि देश में ओबीसी की आबादी लगभग 60% परसेंट हैं लेकिन क्या ओबीसी आबादी के साथ सच में इंसाफ़ हो रहा है?
“ओबीसी आधे से ज्यादा है
फिर भी अपना हक नहीं पाता है”
राजद सांसद ने कहा कि देश का हर दूसरा व्यक्ति ओबीसी है लेकिन सरकार बताए कि आज सचिवालय, आयोगों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक उपक्रमों में कितने OBC निर्णायक पदों पर हैं? ओबीसी को मिलने वाली 9 लाख से अधिक नौकरियां उन्हें नहीं दी गईं। मंडल कमीशन लागू हुए 36 साल हो गए लेकिन फिर भी OBC के आरक्षित कोटे की 7% vacancies रिक्त है। कौन बेईमान लोग है जो ओबीसी युवाओं को न केवल उनके कोटे से बल्कि उनके लंबित अधिकारों से भी वंचित कर दिया है।
UGC के आंकड़ों के अनुसार, उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव और उत्पीड़न में 118.4% की बढ़ोतरी हुई है।
संजय यादव ने कहा कि आजकल एक नया फ़िल्टर NFS (Not Found Suitable) लगा दिया गया है। कौन लोग है जो OBC/SC/ST को Not Found Suitable करते है? मतलब इस देश के हर दूसरे व्यक्ति में उन्हें कोई काबिल, Suitable और उपयुक्त व्यक्ति नहीं मिलता?
ओबीसी को NFS डिक्लेअर करने वालों की सामाजिक पृष्ठभूमि की जाँच करनी चाहिए? क्या वो अपने जन्मजात श्रेष्ठता के अंहकार बोध में पले-बढ़े संकीर्ण ,नकारात्मक मानसिकता से ग्रस्त लोग है?
राजद सांसद ने कहा कि ओबीसी आरक्षण और उसके अधिकारों को कमजोर करने में न्यायिक हस्तक्षेपों ने अहम भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि आइए हम स्वयं से पूछें: क्या हमने वास्तव में 78 साल में इस देश में वंचित उपेक्षित उत्पीड़ित लांछित वर्गों के लिए समान अवसर पैदा किए हैं? – जवाब है ‘नहीं’। अगर हम इन बात करते हैं तो हम जातिवादी और आप राष्ट्रवादी। हम पिछड़े -दलित, दर्दमंद और जरूरतमंद की बात करे तो जंगलराज वाले और आप इंसान से इंसान को लड़ाओं, नफ़रत फैलाओ तो मंगलराज वाले।



