

भगवान राम का अवतरण मानवता के इतिहास में केवल एक धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि आदर्श जीवन का अनुपम प्रतिमान है। राम का जन्म सत्य, धर्म और मर्यादा की पुनर्स्थापना के लिए हुआ। वे केवल अयोध्या के राजकुमार नहीं, बल्कि समस्त मानव जाति के लिए कर्तव्यपरायणता, त्याग और न्याय के जीवंत उदाहरण हैं। “मर्यादा पुरुषोत्तम” के रूप में उन्होंने जीवन के प्रत्येक आयाम में संतुलन, अनुशासन और करुणा का संदेश दिया।
राम ने समाज के सभी वर्गों—निषादराज, शबरी, अहिल्या, वानर और भालुओं—को समान स्नेह और सम्मान देकर यह सिद्ध किया कि सच्चा नेतृत्व वही है जो भेदभाव से परे हो। वे प्रजा के हित में अपना सर्वस्व त्यागने वाले प्रजापालक थे। रघुकुल की परंपरा को निभाते हुए उन्होंने वचन की रक्षा को सर्वोपरि माना। माता-पिता की आज्ञा, गुरु विश्वामित्र के प्रति श्रद्धा और वैदेही सीता के साथ आदर्श दांपत्य—इन सभी में उनका चरित्र दिव्य आभा से आलोकित है।
राम का जीवन त्रेता से कलियुग तक सतत प्रेरणा का स्रोत है। उनके कर्म और वचन आज भी हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों में जीवित हैं। रामनवमी का यह पावन पर्व हमें आत्ममंथन का अवसर देता है कि हम भी अपने जीवन में सत्य, करुणा, एकता और कर्तव्यनिष्ठा को स्थान दें।
इन्हीं मंगल भावनाओं के साथ, डॉ. ज्वाला चंद चौधरी, सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग, एम.एल.एस.एम. महाविद्यालय, दरभंगा (बिहार) की ओर से आप सभी को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं।
जय श्री राम



