
बाप प्रमुख श्री उमेश सिंह जी ने सिवान के बंगरा में संतोष सिंह नाम के व्यक्ति को दलित समुदाय के द्वारा अर्धनग्न गाव में घुमाने की घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि मामला चाहे जो भी पर यह तलिवानी फैसला कतई स्वीकार नहीं है ,अगर सन्तोष सिंह ने बाबा साहेब को अपशब्द और किसी जाति को अपमानित किया था, तो उन लोगों को कानून का सहारा लेना चाहिए था, जो बाबा साहेब का ही दिया हुआ माना जाता है ,उन्होंने ने कहा कि देश में जब गांधी जी नेहरू पटेल जी एवं अन्य महापुरुषो के विचारों की आलोचना हो सकता है तो बाबा साहेब का भी हो सकता है ,इसलिए लोकतंत्र की स्थापना हुई है, लेकिन विरोध का तरीका शालिन होना चाहिए गाली गलौज के द्वारा नहीं ,उन्होंने ने कहा कि हम रोज देखते की कुछ अज्ञानी अपने को अम्बेडकर वादी कहने वाले लोग स्वर्ण जाती को अभद्र बोल कर ख्याती प्राप्त करते हैं ,उसमें कुछ मिडिया वाले भी हैं जो कुकरमुत्ते की तरह पैसा कमाने के लिए ग़लत सलत बोलने वाले लोगों को खोजकर बोलवाते है, जबकि कभी भी स्वर्ण जाती के लोग उसका प्रतिकार इस रुप में नहीं किया है ,और तो और सनातन के आराध्य देव को भी अभद्र बोलते हैं ये सभी सस्ती लोकप्रियता हासिल करने वाले अज्ञानी जो अपने आप को समाज को दिशा देने वाले मानते हैं, पार्टी प्रमुख श्री सिंह ने बिहार सरकार के मुखिया से आग्रह किया है इस तलिवानी विचार धारा के सफाया के लिए होमवर्क करें और विपक्ष भी इसमें सकारात्मक सहयोग करें वोट का लालच छोड़कर ताकि समाज में अनुशासन कायम रहे बिना अनुशासन के राज्य चौतरफा विकास नहीं विनाश को प्राप्त करेगा,( रमेश पासवान राष्ट्रीय प्रवक्ता)

