जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश कार्यालय, पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य श्री कमर आलम ने कहा कि बिहार की पहचान आज किसी अफ़वाह, किसी आरोप या किसी क्षणिक सियासी शोर से नहीं तय होती।
बिहार की असल पहचान काम की सच्चाई, अमन की मजबूती, इंसाफ़ की ईमानदारी और तरक़्क़ी की निरंतरता से बनती है—और इस पहचान को आकार देने में यदि किसी एक नेतृत्व की भूमिका सबसे स्पष्ट और विश्वसनीय है, तो वह है मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का नेतृत्व।

दिनांक: 20 दिसंबर 2025
जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश कार्यालय, पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य श्री कमर आलम ने कहा कि बिहार की पहचान आज किसी अफ़वाह, किसी आरोप या किसी क्षणिक सियासी शोर से नहीं तय होती।
बिहार की असल पहचान काम की सच्चाई, अमन की मजबूती, इंसाफ़ की ईमानदारी और तरक़्क़ी की निरंतरता से बनती है—और इस पहचान को आकार देने में यदि किसी एक नेतृत्व की भूमिका सबसे स्पष्ट और विश्वसनीय है, तो वह है मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का नेतृत्व।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार को केवल सड़कों और इमारतों के ज़रिये नहीं जोड़ा, बल्कि उन्होंने इसे भरोसे, इंसानियत और बराबरी के ऐसे मज़बूत धागों से बुना, जो समय की हर कसौटी पर खरे उतरते हैं।
आज बिहार की सड़कें सिर्फ़ शहरों और क़स्बों को नहीं जोड़तीं—
वे गाँव के ग़रीब बच्चे को शिक्षा की रोशनी से,
मज़दूर को रोज़गार की इज़्ज़त से,
मरीज़ को इलाज की राहत से
और बेटियों को एक सुरक्षित, स्वाभिमानी और बेख़ौफ़ जीवन से जोड़ती हैं।
यही विकास की वह ज़मीनी सच्चाई है, जिसे बिहार की जनता रोज़ महसूस करती है।
नुसरत परवीन के मामले पर अपनी बात रखते हुए श्री आलम ने कहा कि कुछ लोग एक संवेदनशील विषय को राजनीतिक लाभ का साधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सच्चाई पूरी तरह स्पष्ट और सामने है।
उन्होंने बताया कि 20 दिसंबर 2025 से नुसरत परवीन पुनः अपनी ड्यूटी पर लौट रही हैं और कॉलेज प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि वह और उनका परिवार पूरी तरह सुरक्षित, संतुष्ट और मानसिक रूप से शांत हैं।
यही फर्क है—
एक ओर कैमरों की बनावटी संवेदना,
और दूसरी ओर कानून, संवेदनशीलता और ज़िम्मेदारी पर टिका हुआ शासन।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार का बिहार महिलाओं को केवल भाषणों में सम्मान नहीं देता, बल्कि ज़मीनी हक़ीक़त में अधिकार, सुरक्षा और इज़्ज़त देता है।
शक्षा में आरक्षण हो, पंचायतों में भागीदारी हो या देर रात सुरक्षित आवागमन—
बिहार की बेटियाँ आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं।
यह बदलाव किसी नारे की देन नहीं, बल्कि नीतियों की स्पष्टता और नीयत की सच्चाई का परिणाम है।
मुस्लिम समाज के संदर्भ में श्री आलम ने पूरे भरोसे के साथ कहा कि बिहार के मुसलमान इस विकास यात्रा के केवल सहभागी नहीं, बल्कि इसके मज़बूत स्तंभ हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी, छात्रवृत्तियों का विस्तार और रोज़गार में हिस्सेदारी इस बात का प्रमाण है कि यह सरकार पहचान नहीं, हक़ और मेहनत देखती है।
रोज़गार के विषय पर उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने वह करके दिखाया है, जो लंबे समय तक केवल चुनावी वादों में सिमटा रहा।
अब तक बिहार में 10 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मिल चुका है।
आने वाले समय में 1 करोड़ लोगों को रोज़गार देने का लक्ष्य स्पष्ट योजना, ठोस नीति और मज़बूत संकल्प के साथ तय किया गया है।
ये केवल आंकड़े नहीं हैं—
ये लाखों घरों की रौशनी,
लाखों युवाओं का आत्मसम्मान
और अनगिनत माँ-बाप की दुआएँ हैं।
महिलाओं के सम्मान और न्याय पर सरकार की सोच स्पष्ट करते हुए श्री आलम ने कहा कि किसी भी महिला के साथ—चाहे वह किसी भी वर्ग, परिवार या राजनीतिक दल से जुड़ी हो—यदि अन्याय हुआ है, तो उसे न्याय मिलना चाहिए।
औरत की पीड़ा को राजनीति का औज़ार नहीं, बल्कि न्याय का विषय बनाया जाना चाहिए।
यही नीतीश कुमार के शासन की नैतिक पहचान और संस्कार है।
उन्होंने कहा कि जो लोग आज अचानक महिलाओं और मुसलमानों की चिंता में बेचैन दिखाई दे रहे हैं, उनकी बेचैनी की वजह भी किसी से छुपी नहीं है।
2025 के चुनावों में जनता ने अपना फ़ैसला पूरे स्पष्ट शब्दों में सुना दिया है।
आरजेडी को करारी हार मिली है और वह केवल 25 सीटों तक सिमट कर रह गई है।
यह शोर संवेदना का नहीं, बल्कि हार की हताशा और राजनीतिक बौखलाहट का है।
अपने वक्तव्य के समापन पर श्री आलम ने कहा कि बिहार अब पीछे मुड़कर देखने वाला प्रदेश नहीं है।
बिहार का भविष्य परिवारवाद, अराजकता और डर की राजनीति में नहीं, बल्कि सुशासन, स्थिरता और भरोसे में सुरक्षित है।
आज बिहार की पहचान सुरक्षित महिलाएँ, आगे बढ़ता मुस्लिम समाज, रोज़गार पाते नौजवान, मज़बूत इंफ्रास्ट्रक्चर और ऐसा नेतृत्व है, जिसकी नीयत और ईमानदारी पर कोई सवाल नहीं उठता
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार आज केवल मुख्यमंत्री नहीं है
वह सुशासन का पर्याय,
ईमानदारी की मिसाल
और हर कमज़ोर, हर वंचित की उम्मीद हैं।
और यही नीतीश कुमार की सबसे बड़ी जीत है।
अंत में श्री आलम ने मीडिया के तमाम साथियों का दिल से आभार व्यक्त किया और कहा कि सच्चाई को परखने, जनता तक सही संदेश पहुँचाने और निष्पक्ष संवाद बनाए रखने में मीडिया की भूमिका लोकतंत्र की आत्मा को मज़बूती देती है। (अशोक कुमार) कार्यालय सचिव



