बाप प्रमुख श्री उमेश सिंह जी ने यूजीसी के नये प्रवधान की समीक्षा कर सुधार करने का आग्रह केन्द्र सरकार से किया है

बाप प्रमुख श्री उमेश सिंह जी ने आग्रह करते हुए केंद्र सरकार से कहा है कि यूजीसी कानून में स्वर्ण को भी अपनी शिकायत करने का अधिकार मिलना चाहिए, इसके लिए केंद्र सरकार को संजीदा होना चाहिए,तभी यह कानून समानता लाने में कामयाब होगा अभी तो इस कानून का स्वरूप असमानता को बढ़ावा देने वाला ही है,जब की इसको शिक्षण संस्थानों में समानता लाने के नाम पर बनाया गया है,और मुझे हैरानी इस बात की है इतने अयोग्य और संकीर्ण मानसिकता के लोग वहां पहुंचे हुए चमचागिरी के बल पर जहा कानून बनते हैं, कानुनों का निर्माण या संशोधन न्याय को समझने वाला ज्ञानीजनों के द्वारा होना चाहिए,यह तो इसी तरह से साफ नज़र आ रहा है कि इस कानून के प्रवधान में स्वर्ण समाज को पहले से ही अपराधी मान लिया गया है बस शिकायत कर उनको बर्बाद करना है,पार्टी प्रमुख ने कहा कि समय बदला है और यह मानना की दबंग सिर्फ स्वर्ण ही हो सकता है यह पुरी तरह से ग़लत है अब ज्यादा आरक्षित वर्ग और एसी एसटी और ओबीसी के लोगों के अन्दर राजे महाराजे और जमींदार वाले समानतवादी विचार धारा हिचकोले मार रहा है और वे स्वर्ण छात्रों को कुछ नहीं समझते हैं, अब इस कानून की जरूरत नहीं थीं, अगर समानता के नाम पर बनाया भी गया तो दोनों पक्षों के चौतरफा सुरक्षा के बारे में गौर कर ही इसे लागू करना चाहिए था, बिना विचारे कुछ न करें ताकि बाद में पछताना पड़े सरकारे संजीदा से होमवर्क कर ही कोई फैसला ले, फैसला का अधार वोट नहीं न्याय होना चाहिए जीसमे सभी को बल प्राप्त हो, पार्टी प्रमुख ने कहा कि इस निर्णय से सनातनी एकता बाधित होगी,जो धिरे धिरे अपने चरम पर पहुंच रहा था,(रमेश पासवान राष्ट्रीय प्रवक्ता)



