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मत्स्य मंत्री के संरक्षण में हो रहा प्रतिबंधित मछलियों का अवैध व्यापार

संवाददाता सम्मेलन

मत्स्य मंत्री के संरक्षण में हो रहा प्रतिबंधित मछलियों का अवैध व्यापार: कश्यप

प्रतिबंधित मछलियाँ थाई मांगूर के पालन, प्रजनन एवं बिक्री पर रोक लगाए सरकार

मछलियों के अवैध व्यापार को रोकने पर कॉफ्फेड प्रतिनिधियों को मंत्री कोषांग से दी जा रही है धमकी

07 सितम्बर 2025, पटना। बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने मीन भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि एवं सहकारिता विभाग, कृषि, मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार एवं बिहार सरकार ने थाई मांगूर एवं बिगहेड मछली के पालन, प्रजनन एवं बिक्री पर देशभर में प्रतिबंध लगा रखा है। प्रतिबंध के बावजूद बिहार राज्य के प्रत्येक जिला में थाई मांगूर मछली का पालन, प्रजनन एवं बिक्री धडल्ले से हो रही है। जोकि राज्य के ईको सिस्टम के लिए घातक है।

श्री कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा निर्गत पत्र को कॉफ्फेड के द्वारा राज्य के सभी मछुआ समितियों के मंत्रियों, अध्यक्षों संघ के निदेशक बोर्ड के सदस्यों तथा संघ के पदाधिकारी एवं कर्मचारियों को थाई मांगूर एवं बिगहेड मछली के पालन, प्रजनन एवं बिक्री पर प्रतिषेध संबंधी आदेश को सख्ती से अनुपालन करने का निर्देश जारी किया गया। निर्देश के आलोक में प्रमण्डल संयोजक के द्वारा औरंगाबाद जिले में 4 सितम्बर को थाई मांगुर से भरा ट्रक पकड़ कर मुफशिल थाना, औरंगाबाद के हवाले किया गया। प्रबंध निदेशक के द्वारा थाई मांगुर मछली की पहचान कर थानाध्यक्ष को आवश्यक कानूनी कारवाई हेतु पत्र लिखा गया। इसी बीच मंत्री कोषांग से श्री सतिश कुमार एवं श्री अमित कुमार के द्वारा फोन करके कॉफ्फेड के प्रमण्डल संयोजक श्री राकेश कुमार को धमकी देते हुए कहा गया कि तुमको जेल भेजवा देंगें, तुम मछली रोकने वाले कौन होते हो ? मालूम हो कि प्रधान लिपिक के पद पर कटिहार जिला मत्स्य कार्यालय में पदस्थापित श्री सतिश कुमार 27 अप्रैल 2018 को रिश्वत लेने के आरोप में निगरानी के हत्थे चढ़कर जेल का हवा खा चुके है। 18 नवम्बर 2022 एवं 25 अप्रैल 2024 को वे निलम्बित भी हो चुके है। उनको बरखास्त करने के स्थान के पर विभाग उन्हे मंत्री कोषांग में पदस्थापित किए हुए है। उनके माध्यम से विभागीय पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं मछुआ समितियों के मंत्रियों से करोडों रूपये का उगाही विभागीय मंत्री के द्वारा किया जा रहा है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए।

श्री कश्यप ने आगे कहा कि दो लाख मैट्रिक टन थाई मांगू का अवैध व्यापार अकेले बिहार में हो रहा हैै। जिससे दो हज़ार करोड़ रूपये सेे अधिक का अवैध कमाई हो रहा है। अवैध कमाई में विभागीय मंत्री, अधिकारी एवं पुलिस प्रशासन सभी का हिस्सा है। इस प्रकार यह व्यवसाय सरकार के मिली भगत से धरल्ले से जारी है जिसका सीधा नुकसान परंपरागत मछुआरा समाज को उठाना पड़ रहा है।

आगे उन्होने बताया कि ये विदेशी मछलियाँ मांसाहारी एवं आक्रामक प्रकृति की होती हैं और स्थानीय देशी मछली की प्रजातियों को खाकर उनकी संख्या कम कर देती है। इससे जैव विविधता को भारी नुकसान हो रहा है। थाई मांगूर विशेष रूप से गंदे पानी में पाली जाती है और जलाशयों, तालाबों, नदियों को प्रदूषित कर देती है, जिससे अन्य जलीय जीवों का जीवन संकट में आ जाता है। इन प्रजातियों के प्रसार के कारण स्थानीय मत्स्यपालकों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है और इसके सेवन से संक्रमण और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

श्री कश्यप ने कहा की सभी जिलों के मत्स्य पदाधिकारियों एवं जिला पदाधिकारियों को इन प्रतिबंधित प्रजातियों का पालन, व्यापार और उत्पादन पूर्ण रुप से रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए जाए। स्थानीय स्तर पर इन मछलियों के अवैध प्रसार को रोकने के लिए सख्त मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाए।

इस संवाददाता सम्मेलन में श्री अरुण साहनी, निदेशक, प्रो० शिव शंकर निषाद, पूर्व उपाध्यक्ष, श्री विद्याभूषण केवट, निदेशक, श्री मदन कुमार, निदेशक, श्री राकेश कुमार, प्रमंडल संयोजक, श्री कैलाश सिंह निषाद, जिलाध्यक्ष, श्री मनोज कुमार, श्री सतिश कुमार, लाल बाबू, सुदामा, रवि कुमार, गोपी कुमार, प्रमोद कुमार, दयानंद कुमार आदि उपस्थित थे।

(गोपी कुमार)
मीडिया प्रभारी
मो॰: 9939470408

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