श्रीबाबू की जयंती पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की भाषण ,श्री बाबू आधुनिक बिहार में लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने वाले नायक थे।

श्रीबाबू की जयंती पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष की भाषण ,श्री बाबू आधुनिक बिहार में लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने वाले नायक थे।
पटना, 25 अक्तूबर, 2026
महान स्वतंत्रता सेनानी, बिहार केसरी डॉ श्रीकृष्ण सिंहजी की 139वीं (एक सौ उनतालीसवीं) जयंती पर हम स्मरण करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। पूरा देश उनको श्रीबाबू के रूप में सम्मान से याद करता है।
मैं आयोजन समिति का आभारी हूं कि आपने मुझे इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया।
बिहार की पावन धरती लोकशाही की जन्म भूमि मानी जाती है। श्री बाबू आधुनिक बिहार में लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने वाले नायक थे। उन्होंने बिहार में सामाजिक न्याय का नया अध्याय जमींदारी ABOLISH करके और कमजोर तबकों को आगे लाकर किया।
आधुनिक बिहार के निर्माता के रूप में उन्होंने खेती बाड़ी के विकास, उद्योगों की प्रगति, शिक्षा और सिंचाई सुविधाओं के विकास से लेकर संस्थाएं बनाने में सबसे अधिक काम किया।
मैं राज्य सभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह और कांग्रेस के अपने सभी साथियों को बधाई देता हूं। वे श्रीबाबू की स्मृति को जीवंत बनाए रखने के साथ नई पीढी को बहुत कुछ जानने समझने का अवसर और प्रेरणा दे रहे हैं।
1937 में बिहार में श्रीकृष्ण सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की पहली सरकार बनी, फिर 1946 में दूसरी सरकार बनी। तब अंग्रेजी राज था और मुख्यमंत्री को प्रीमियर कहा जाता था। भारतीय संविधान के तहत 1952 के पहली विधान सभा के चुनाव से 3 जनवरी, 1961 तक श्रीबाबू बिहार के मुख्यमंत्री रहे।
उनके मुख्यमंत्री काल में जमींदारी का खात्मा, भूमि सुधार और चकबंदी एक्ट बना। बरौनी तेल रिफाइनरी, खाद कारखाना और थर्मल पावर प्लांट बना। सिंदरी खाद कारखाना और पहला Rail cum Road राजेंद्र पुल बना। उनके दौर की कई शानदार परियोजनाएं झारखंड में शान से खड़ी हैं।कई विदेशी अर्थशास्त्रियों ने भी उनके मुख्यमंत्री काल में बिहार को देश का सबसे बेहतर शासित राज्य माना था।
आजादी के बाद अनाज से लेकर हर मोरचे पर गंभीर चुनौतियां थीं। आरएसएस और दूसरी सांप्रदायिक शक्तियां दंगा फैलाने में लगी थीं। पर श्रीबाबू ने बहुत कड़ाई से उनका मुकाबला किया। उन्होंने 1950 में कहा
श्रीबाबू ने छुआछूत के खिलाफ मुहिम चलाई। देवघर के प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में दलितों और वंचित समाज के प्रवेश पर लगी पाबंदी समाप्त कराई। 1953 में कड़े विरोध के बाद भी खुद सैकड़ों लोगों के साथ जाकर उनको मंदिर में प्रवेश दिलाया था।
वो दौर अलग था, लेकिन आज भी छुआछूत और संविधान विरोधी भावना वाले लोग आरएसएस बीजेपी में भरे पड़े हैं। उत्तराखंड के हल्द्वानी के रामलीला मैदान में 8 अगस्त 2026 को हमारी एक जनसभा के बाद आरएसएस, भाजपाने हवन कराकर मंच का शुद्धिकरण कराया, ये आप लोगों ने पढा-सुना होगा।
संसद में जेपी नड्डा ने खेद जताया, लेकिन इस मसले में कोई एक्शन नहीं हुआ, उलटे राहुल गांधी पर एफआईआर करा दी गयी। मोदीजी संविधान की बड़ी बातें करते हैं पर छुआछूत का भाव रखने वालों को संरक्षण देते हैं।
मैं आप सभी प्रबुद्ध लोगों और बिहार के अपने सभी भाइयों से अपील करूंगा कि अश्पृश्यता की भावना को जड़ से समाप्त करें। यही सबसे बड़ी बीमारी जबसमाप्त होगी तभी देश में शांति और प्रगति होगी। हिंदू धर्म की एकता में भी यही बात सबसे बड़ी बाधा डालती है। इसीलिए बहुत से लोग धर्म परिवर्तन करते हैं। आरएसएस डराती है पर अश्पृश्यता खत्म करना नहीं चाहती है।
मित्रो, चंपारण आंदोलन से भी पहले 1916 में श्री बाबू की महात्मा गांधी से बनारस में मुलाकात हुई थी। उनके प्रभाव में वे अपनी जमी जमाई वकालत छोड़ कर वे आजादी की लड़ाई में कूदे। उनको उसी तरह बिहार की जनता ने “बिहार केसरी” की उपाधि दी। श्रीबाबू को 1940 मेंगांधीजी बिहार का “प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही”घोषित किया था। आजादी की लड़ाई में उन्होंने आठ साल से अधिक समय तक जेलों में बिताया था।
दोस्तों, दुनिया जानती है कि बिहार की धरती से ही भगवान बुद्ध को Enlightenment(ज्ञान बोध) और महात्मा गांधी को प्रेरणा मिली थी। भगवान महावीर की धरती है। ये चाणक्य, पाणिनी और आर्यभट्ट की धरती है और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की जन्मभूमि भी है।
बिहार के महान सपूत राजेंद्र बाबू और जगजीवन रामजी तो हमारी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भी रहे। भारत रत्न राजेंद्र बाबू देश के पहले राष्ट्रपति और संविधान सभा के अध्यक्ष रहे। आजकल के तमाम नेता घरों के लिए लड़ते हैं पर राजेंद्र बाबू दिल्ली से पटना आकर सदाकत आश्रम में छोटे से स्थान पर आखिरी सांस तक रहे।
मित्रों, बिहार में प्रदेश कांग्रेस का मुख्यालय सदाकत आश्रम (सच्चाई का आश्रम) केवल राजनीतिक दल का मुख्यालय भर नहीं है, बल्कि आजादी के आंदोलन का केंद्र भी रहा है।बिहार में 1912 मे बांकीपुर (पटना) कांग्रेस अधिवेशन में ही
पहली बार पंडित जवाहर लाल नेहरू डेलीगेट की हैसियत से कांग्रेस में शामिल हुए थे।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी लोकतंत्र की गरिमा और नैतिकता के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होने कहा था कि- ‘मैं ऐसे भारत के निर्माण के लिए कोशिश करूंगा, जिसमें गरीब से गरीब आदमी भी महसूस करेंगे कि यह देश उनका है, उनकी आवाज का महत्व होगा, ऊंच नीच का भेद नहीं होगा तथा स्त्रियों को भी बराबर के अधिकार मिलेंगे।’
लेकिन आज पढे लिखे बच्चों और प्रबुद्ध लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है। गरीब और कमजोर तबकों का वोट चोरी हो रहा है।
BJP ECI की मिलीभगत से SIR से Voter List Manipulation करा कर विरोधी दलों के समर्थकों के नाम voter list से कटवा रही है। जहां चालबाजी नहीं चलता वहां ये विधायकों को खरीदने के लिए ED, CBI, IT का इस्तेमाल कराती है।
इसलिए मैं लोकतंत्र की जननी बिहार से ये अपील करता हूं कि आप देश भर में चल रहे हमारे आंदोलन का साथ दें। क्योंकि अगर लोगोंका वोट का अधिकार नहीं बचा तो फिर से देश गुलाम हो जाएगा। यह आजादी की दूसरी लड़ाई है, इसमें घर बैठने से काम नही चलेगा।
पिछले चंद महीनों में जो कुछ घटा है, उससे साफ है कि मोदी सरकार और चुनाव आयोग के बीच बहुत गहरी सांठ गांठ है। उसी के तहत 2023 में मोदीजी ने ज्ञानेश कुमार को जीवन भर के संरक्षण देने वाला वो कानून बनवा दिया है जो राष्ट्रपति औऱ भारत के मुख्य न्यायाधीश के लिए भी लागू नहीं है। भारत के इतिहास में यह सबसे बड़ी बेईमानी और घोटाला साबित होगा।
इस कानून को बनाने के बाद मोदीजी और शाह ने ज्ञानेश कुमार को कह दिया कि हमारे कहने पर वे जो बेईमानी करेंगे, वो डंके की चोट पर कर सकते हैं, उनको कोई सजा नहीं मिलेगी। इसीलिए ज्ञानेश कुमार के बराबर हैसियत वाले दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार घोटालों पर ऐतराज जताया पर उनकी सुनी तक नहीं गयी। क्योंकि उनको तो मोदीजी पहले ही सारी गलतियों की भी माफी दिला चुके है।ज्ञानेश कुमार जी एक पार्टी को जिताने के लिए ही काम नहीं कर रहे हैं,बल्कि बड़े अफसरों को वो बीजेपी का टिकट दिला कर मंत्री बनवाने का भी ठेका ले रहे हैं ये खुलासा केरल के एक पूर्व चीफ सेकेट्री कर चुके हैं।
इसीलिए जनता के सामने अब अपना मताधिकार बचाने और वोट चोरी को रोकने के लिए शांतिपूर्ण तरीके से सडक पर उतर कर विरोध जताने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है।
मोदी जी संसद सत्र के दौरान हाउस में नहीं आते । शाह डर के हाउस में नहीं आता और ये लोग पूछते हैं राहुल जी कहाँ गए ? क्यों अभी संसद चल रहा है?
मोदी सरकार और बिहार की राज्य सरकार अनैतिक साधनों और शक्तियों पर खड़ी है। बिहार देश का पहला राज्य है जहां एसआईआर के नाम पर वोट चोरी का पहला प्रयोग बीजेपी ने किया जो सफल रहा। देशव्यापी SIR का आदेश बिहार के चुनाव के बीच ही कर दिया गया था।
अमित शाह और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार बार-बार कहते रहे हैं कि बिहार में SIR घुसपैठियों को बाहर करने के लिए हुआ। मैं इनसे पूछना चाहता हूं कि बिहार में जो वोटर लिस्ट से बाहर हुए उसमें कितने घुसपैठिया थे। मुझे मालूम है कि इसका जवाब ये नहीं दे सकते क्योंकि ये झूठ, जालसाजी की बुनियाद पर खड़े हैं।
आप लोगों को पता होगा कि मोदी सरकार ने जो गारंटी दी थी उसी पर वे फेल हो चुके हैं।
जैसे 2014 में मोदीजी ने दावा किया था कि
➢ डालर से रुपया मजबूत होगा
➢ महंगाई कम हो जाएगी
➢ 100 दिन में कालाधान वापस होगा
➢ हर साल दो करोड़ नौकरियां देंगे
➢ हर खाते में 15 लाख डालूंगा
➢ 2022 तक 100 स्मार्ट सिटी बनेगे
➢ 2022 तक हर भारतीय के पास पक्का मकान होगा
फिर 2016 में मोदीजी ने कहा कि
➢ 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी होगी
2017 में कहा कि
➢ हर घर में 2022 तक बिजली, पानी और शौचालय की सुविधा होगी
2019 में कहा कि
➢ 2022 तक भारत की इकोनामी 5 ट्रिलियन डालर की होगी
आप लोग गवाह हैं। 2026 बीतने जा रहा है, इनका एक भी वादा जमीन पर नहीं उतरा।
इसीलिए बिहार को विशेष राज्य से लेकर मोदीजी ने बहुत सा दावा किया पर हर मापदंड पर बिहार कई राज्यों से बहुत पीछे है। युवाओं में बेरोजगारी दर आज बिहार में सबसे ज्यादा है। पिछले एक दशक में करीब 350 कारख़ाने बंद हो गए। यहां 24 चीनी मिलें होती थीं, जो बंद हो गयीं।
बीजेपी और आरएसएस बुनियादी मसलों पर काम करने की जगह उत्तर- दक्षिण, जाति, धर्म, भाषा, खानपान, dress, reading habits और way of living से लेकर ऐसा जहर फैलाते हैं ताकि समाज में POLARISATION हो और देश और समाज बंटे।
RSS-BJP बहुत लंबे समय से कमजोर तबकों का अधिकार छीनने का काम कर रही है। पिछले 12 सालों में अंधाधुंध निजीकरण करके, सरकारी नौकरियां खत्म करके ये बैकडोर से आरक्षण खत्म करने का रास्ता बना रहे हैं।
RSS के दबाव में Vice Chancellors की बहाली होती है। दूसरे विचारों के प्रोफेसरों के साथ भेदभाव किया जाता है। बीजेपी और RSS के दफ्तर पर दफ्तर सरकारी छत्रछाया में बन रहे हैं। इतना पैसा कहां से आ रहा है, इसका जवाब ये नहीं देते।
साथियों, श्री बाबू उस संविधान सभा के गौरवशाली सदस्य थे जिसने Adult franchise पर मुहर लगाई थी। गांधीजी, राजेंद्र बाबू, पंडित जवाहर लाल नेहरू और बाबा साहेब ने जब Adult franchise के लिए लड़ाई लड़ी तो श्रीबाबू उनकी सोच के साथ थे। वे जानते थे कि बिना लोकतांत्रिक हिस्सेदारी के गरीब और वंचित लोगों की कोई सुनवाई नहीं होगी।
संविधान सभा में बाबा साहेब डॉ अंबेडकर ने 15 जून 1949 को कहा था कि “Franchise is a most fundamental thing in a democracy.”
राष्ट्रीय स्तर पर बहुत से सवाल हैं, पर वोट का अधिकार बचाने की लड़ाई आज सबसे बड़ी है। आप सभी ने इस बीच में लोक सभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी और विपक्ष के अन्य नेताओं के बयानो को सुना होगा। पूरे देश में चुनाव आयोग की ONE SIDED और बेईमान भूमिका पर चर्चा हो रही है।
लेकिन मोदी सरकार ने मूल मुद्दों के निराकरण की जगह जंतर मंतर के लोकतंत्र के केंद्र को ही सदा के लिए बंद कर दिया। कल गांधी मैदान की बारी भी आ सकती है, इसलिए आप लोगों को सावधान रहना है।
विपक्षी दल मतदाता सूची में अपात्र लोगों को शामिल करने के लिए नहीं संविधान, लोकतंत्र और मताधिकार को बचाने के लिए लड़ रहे हैं। इसीलिए हमारा आंदोलन जारी है।
INDIA Bloc के साथियों ने राष्ट्रपति जी से मिलकुछ मांगे रखी हैं-
1. CECज्ञानेश कुमार का इस्तीफ़ा और 2023 कावो क़ानून निरस्त हो जो उनको आजीवन कानूनी संरक्षण देता है।
2. SIR की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए और अवैध रूप से हटाए गए मतदाताओं के नाम तत्काल बहाल हों।
3. सभी चुनाव पेपर बैलेट से कराए जायें ।
4. पिछले दो वर्षों में हुए उन सभी विधानसभा चुनावों को निरस्त किया जाए, जिनमें वोट चोरी के निर्णायक सबूत प्रस्तुत किए गए हैं।
इसलिए श्रीबाबू को आदर से याद करते हुए और श्रद्धांजलि देते हुए मैं इस फ़ोरम से देश की जनता से अपील करना चाहूंगा कि वे अपने और अपने साथी नागरिकों के वोटों की रक्षा के लिये आगे आएं।
1 नवंबर को रामलीला मैदान पर हमारी दिल्ली में रैली हो रही है। इसमें भी आप लोग साथ दें। देश के लोकतंत्र और अपने अधिकारों को बचाने के लिए हमारे साथ जुड़े।
जय हिंद, जय संविधान, यह कांग्रेस



