वर्तमान स्वरूप में फरक्का जल संधि का नवीनीकरण मंजूर नहीं – संजय कुमार झा
अब बिहार के हितों की अनदेखी करना मुश्किल - उमेश सिंह कुशवाहा पार्टी के अभियान को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन - लेशी सिंह



- वर्तमान स्वरूप में फरक्का जल संधि का नवीनीकरण मंजूर नहीं – संजय कुमार झा
अब बिहार के हितों की अनदेखी करना मुश्किल – उमेश सिंह कुशवाहा
पार्टी के अभियान को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन – लेशी सिंह
4 नवंबर 2026, कटिहार/पटना
कटिहार में जदयू के ‘‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’’ कार्यक्रम का भव्य समापन पार्टी के कला, संस्कृति एवं खेल प्रकोष्ठ ने इस मुद्दे पर आयोजित किया जागरुकता मैराथन।
बुधवार, 4 नवंबर 2026 को कटिहार में जदयू के ‘‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’’ कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ। कटिहार इस अभियान का 12वां पड़ाव था। यहाँ से पहले इस अभियान के तहत राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा तीन चरणों में गंगा किनारे बसे शेष 11 जिलों – बक्सर, भोजपुर, बेगूसराय, खगड़िया, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, पटना, लखीसराय, मुंगेर और भागलपुर – में संवाद कर चुके थे। ध्यातव्य है कि बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है। यही कारण है कि इस जन-जानगरुकता अभियान का शुभारंभ 5 सितंबर को बक्सर से हुआ, जबकि समापन कटिहार में हुआ।
समापन कार्यक्रम से पूर्व जदयू कला, संस्कृति एवं खेल प्रकोष्ठ ने इस मुद्दे पर कटिहार में जागरुकता मैराथन का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता रही। जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा भी इसमें शामिल हुए।
वहीं, कटिहार टाउन हाॅल में आयोजित भव्य समापन कार्यक्रम में भवन निर्माण मंत्री श्रीमती लेशी सिंह, विधायक श्री दुलाल चन्द्र गोस्वामी, विधायक श्री विजय सिंह निषाद, पूर्व सांसद श्री अशफाक करीम, महादलित आयोग के अध्यक्ष श्री मनोज ऋषि, अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री शंभू सुमन, नागरिक परिषद के महासचिव सूर्यदेव मंडल, जदयू जिलाध्यक्ष श्री सूरज प्रकाश राय, नगर अध्यक्ष श्री राणा विशाल सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारीगण और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर पार्टी द्वारा तैयार की गई डाॅक्यूमेंट्री फिल्म खास तौर से दिखाई गई। साथ ही विस्तृत जानकारी वाला पम्फलेट भी बांटा गया।
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री संजय कुमार झा ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह संधि भारत के, खासकर बिहार के हित में नहीं है, इसलिए इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और अगर कोई संधि होती भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। वर्तमान स्वरूप में इसका नवीनीकरण हमें मंजूर नहीं। इस जल संधि के कारण बिहार का जल-प्रबंधन बुरी तरह बिगड़ा है और हम गंभीर जल-संकट का सामना कर रहे हैं। श्री संजय कुमार झा ने आगे कहा कि इस संधि के कारण शुष्क मौसम में सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जाता है। बिहार और केन्द्र की तत्कालीन सरकार में बैठे लोगों ने बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी। उन लोगों ने यह नहीं सोचा कि ऐसा करके वे बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों का पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत, लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष श्री उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को दोतरफा नुकसान हो रहा है। जहाँ फरक्का बराज के कारण गंगा में गाद जमा होने से उसका तल ऊँचा हो गया है और उसके कारण हमें हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ता है, वहीं फरक्का जल संधि के कारण हमें अपने हिस्से का पानी भी बांग्लादेश को देना पड़ता है और इस कारण हमारे कई जिलों में सूखे की स्थिति आ जाती है। इस अंतर्राष्ट्रीय संधि का 73ः बोझ अकेला बिहार उठा रहा है, ये बिहार के साथ अन्याय नहीं तो और क्या है? श्री कुशवाहा ने श्री संजय कुमार झा को धन्यवाद दिया कि उन्होंने संसद में इस मुद्दे को उठाया और उनके प्रयासों से यह राष्ट्रीय विमर्श का विषय बना। उन्होंने कहा कि अब बिहार के हितों की अनदेखी करना मुश्किल है।
भवन निर्माण मंत्री श्रीमती लेशी सिंह ने कहा कि फरक्का जल संधि बिहार के जल हितों पर कुठाराघात है, जिसका नुकसान राज्य लम्बे समय से उठा रहा है। बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश को देने से राज्य के कृषि, उद्योग, पेयजल आदि को लेकर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में आवश्यक है कि भविष्य में कोई भी निर्णय बिहार के हितों को ध्यान में रखकर लिया जाय। उन्होंने आगे कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है, जो बहुत प्रसन्नता की बात है।
वहीं, अन्य नेताओं ने कहा कि कहा कि पार्टी का यह अभियान बिहार के हक और बिहारवासियों के हित के लिए है। इस अभियान से बिहार के जल अधिकारों से जुड़े सवालों पर बढ़ रही जनभागीदारी इसकी सफलता बयां कर रही है। नेताओं ने इस पहल के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को साधुवाद दिया और विश्वास व्यक्त किया कि 12 दिसंबर को इस संधि की अवधि पूरी होने के बाद बिहार की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
(संजय कुमार सिन्हा)
कार्यालय सचिव


