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कॉफेड और बेनझारको के बीच ऐतिहासिक समझौता (एमओयू) संपन्न, मत्स्यपालन, मखाना व्यापार, बीमा एवं सहकारी विकास को मिलेगी नई गति: ऋषिकेश कश्यप

बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में मत्स्य उत्पादों की आपूर्ति, मखाना के विपणन, प्रसंस्करण, निर्यात, रोजगार सृजन एवं सहकारी सदस्यों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण पहल।’

कॉफेड और बेनझारको के बीच ऐतिहासिक समझौता (एमओयू) संपन्न, मत्स्यपालन, मखाना व्यापार, बीमा एवं सहकारी विकास को मिलेगी नई गति: ऋषिकेश कश्यप

’’बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में मत्स्य उत्पादों की आपूर्ति, मखाना के विपणन, प्रसंस्करण, निर्यात, रोजगार सृजन एवं सहकारी सदस्यों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण पहल।’

पटना, 03 नवंबर 2026। सहकारिता क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा मत्स्यपालकों, मखाना उत्पादकों एवं सहकारी समितियों के लिए व्यापार और रोजगार के नए अवसर विकसित करने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ (कॉफेड)’’ तथा ’’बंगाल झारखंड फिशरीज डेवलपमेंट कोऑपरेटिव (बेनझारको)’’ के बीच मत्स्यपालन, जलीय कृषि, मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, विपणन, वितरण एवं बीमा संबंधी सेवाओं में सहयोग बढ़ाने हेतु एक व्यापक ’’समझौता ज्ञापन (एमओयू)’’ पर हस्ताक्षर किए गए। इस महत्वपूर्ण समझौते पर कॉफेड की ओर से ’’ प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप, ’’ तथा बेनझारको की ओर से ’’ अध्यक्ष सुभोदय पंडित, ’’ ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर ’’कॉफेड की निदेशक सिमरन’’ एवं ’’बेनझारको के निदेशक पिनाकी प्रामाणिक’’ गवाह के रूप में उपस्थित रहे तथा समझौते पर हस्ताक्षर किए। मालूम हो कि दोनों ही सहकारी संस्था बहुराज्यीय सहकारी सहकारी समितियां अधिनियम के अंतर्गत भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के अधीन संचालित एवं कार्यरत है

समझौते के तहत रोहू, कतला, मृगल, कॉमन कार्प, पंगेशियस सहित विभिन्न प्रजातियों की मछलियों, रंगीन मछलियों, सूखी मछली, केकड़ा पालन, झींगा पालन, मोती पालन, मत्स्य बीज, फिश फीड एवं जलीय कृषि उपकरणों की खरीद, आपूर्ति एवं विपणन में सहयोग किया जाएगा। बेनझारको द्वारा कॉफेड के लिए मत्स्य उत्पादों एवं संबंधित इनपुट की आपूर्ति की व्यवस्था विकसित करने तथा संगठित बाजारों तक पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा। इस समझौते के माध्यम से कॉफेड के मखाना एवं मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए नए बाजार विकसित किए जाएंगे। इनमें प्रीमियम मखाना, रोस्टेड एवं फ्लेवर्ड मखाना, मखाना आटा, मखाना लड्डू, चिप्स, कुकीज, पास्ता, मैकरोनी एवं सेवई सहित विभिन्न उत्पाद शामिल हैं। बेनझारको के सहयोग से इन उत्पादों को थोक एवं खुदरा बाजार, संस्थागत खरीददारों, सुपरमार्केट, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तथा अन्य वितरण नेटवर्क तक पहुँचाने के प्रयास किए जाएंगे। आवश्यक स्वीकृतियों एवं अलग व्यापारिक व्यवस्थाओं के आधार पर निर्यात की संभावनाओं पर भी कार्य किया जाएगा।

कॉफेड भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण के अंतर्गत कॉर्पाेरेट एजेंट (कम्पोजिट) के रूप में पंजीकृत है। इस सहयोग के अंतर्गत दोनों संस्थाएँ मछली, मखाना, मछुआरों, मत्स्यपालकों, मखाना उत्पादकों, सहकारी सदस्यों, व्यापारियों एवं अन्य पात्र व्यक्तियों के लिए जीवन बीमा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य बीमा तथा मत्स्यपालन से संबंधित बीमा योजनाओं के प्रति जागरूकता एवं सुविधा प्रदान करने की संभावनाओं पर कार्य करेंगी। सभी बीमा गतिविधियाँ संबंधित वैधानिक अनुमतियों, बीमा कंपनियों की स्वीकृतियों एवं आईआरडीएआई के लागू नियमों के अनुरूप ही संचालित की जाएँगी। दोनों संस्थाएँ मत्स्यपालकों, सहकारी सदस्यों, युवाओं, महिलाओं एवं छोटे उद्यमियों के लिए कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, उद्यमिता एवं बाजार से जुड़ाव के अवसर विकसित करने की दिशा में सहयोग करेंग

समझौते के अंतर्गत बाँधों एवं जलाशयों में वैज्ञानिक मत्स्यपालन, जलीय संसाधनों के सतत उपयोग, इको-टूरिज्म तथा सहकारी सदस्यों एवं उनके परिवारों के स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़े विकास कार्यों की संभावनाओं पर भी संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा। इस साझेदारी का प्रारंभिक प्रस्तावित कार्यक्षेत्र बिहार, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल रहेगा। आवश्यक पंजीकरण, अनुमतियों एवं आपसी सहमति के आधार पर अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग का विस्तार किया जा सकेगा

इस अवसर पर कॉफेड के प्रबंध निदेशक ’’श्री ऋषिकेश कश्यप’’ ने समझौते के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा “हमारा उद्देश्य सहकारी समितियों को केवल पारंपरिक मत्स्यपालन तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें आधुनिक व्यापार, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, बीमा, तकनीक एवं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना है। कॉफेड और बेनझारको के बीच यह साझेदारी मछुआरों और मखाना उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, उनकी आय बढ़ाने तथा नए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है

’’हमारा संकल्प है कि सहकारिता की शक्ति को आर्थिक समृद्धि में बदलते हुए मछुआरों और उत्पादकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।’’ इस समझौते से दोनों संस्थाओं के बीच दीर्घकालिक व्यावसायिक एवं संस्थागत सहयोग का मार्ग प्रशस्त होगा। यह समझौता प्रारंभिक रूप से ’’तीन वर्षों’’ के लिए किया गया है। इसके अंतर्गत पारस्परिक व्यापार, विपणन, प्रशिक्षण, बीमा जागरूकता एवं अन्य विकासात्मक गतिविधियों के लिए आवश्यकतानुसार अलग-अलग व्यावसायिक व्यवस्थाएँ एवं कार्ययोजनाएँ तैयार की जाएँगी। दोनों संस्थाएँ आपसी समन्वय के माध्यम से मत्स्य एवं मखाना क्षेत्र में सहकारी व्यापार को नई दिशा देने का प्रयास करेंगी।

’’यह पहल सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, किसानों एवं मछुआरों की आय बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।’’

(मोनू कुमार)

मीडिया प्रभारी

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