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पटना शेयर निवेश विवाद: आरोपों के बीच श्रीधर पाठक ने रखा अपना पक्ष, निवेशकों का पैसा लौटाने का किया दावा

 

पटना। शेयर निवेश के नाम पर कथित करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद मामले में नामजद श्रीधर पाठक ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा है कि वह फरार नहीं हैं, बल्कि प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ पा रहे हैं। उनका दावा है कि निवेशकों को चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन माध्यम से भुगतान किया जा रहा है और जिन निवेशकों का केवल मूलधन (Principal Amount) शेष है, उन्हें भी अगले 18 महीनों के भीतर राशि वापस करने का प्रयास किया जाएगा।

श्रीधर पाठक के अनुसार, New Era Trading House के निवेशकों से उनकी सीधे बातचीत हो रही है और भुगतान भी उनके बैंक खातों में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के माध्यम से भेजा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके परिवार का निवेशकों के लेन-देन से कभी कोई संबंध नहीं रहा तथा स्टाफ सदस्य राजीव कुमार उर्फ राजू की भी वित्तीय जिम्मेदारी नहीं थी। ऐसे में परिवार और कर्मचारियों को परेशान नहीं किए जाने की अपील की है।

उन्होंने दावा किया कि कई निवेशकों का खाता पहले ही बंद किया जा चुका है क्योंकि उन्हें उनके मूलधन से अधिक राशि का भुगतान किया जा चुका है। वहीं जिन निवेशकों का मूलधन अभी शेष है, उन्हें धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें भी धीरे-धीरे भुगतान किया जा रहा है।

श्रीधर पाठक ने यह भी कहा कि उनके बैंक लेन-देन और कॉल रिकॉर्ड इस बात का प्रमाण हैं कि वह लगातार निवेशकों और संबंधित लोगों के संपर्क में हैं। उनका कहना है कि उनकी मंशा किसी का पैसा हड़पने की नहीं है, बल्कि सभी पात्र निवेशकों का बकाया लौटाने की है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अनावश्यक दबाव और भीड़ का माहौल बनाकर उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। उनके अनुसार, उनके बुजुर्ग पिता, भाई, भाभी और बच्चों तक को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रकार की प्रताड़ना से परिवार पर गंभीर मानसिक प्रभाव पड़ सकता है।

मामले में दर्ज प्राथमिकी का उल्लेख करते हुए श्रीधर पाठक ने कहा कि शिकायतकर्ता आनंद पंडित और अन्य संबंधित लोगों के साथ पूर्व में उनके व्यावसायिक संबंध रहे हैं। उन्होंने न्यायालय से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जिन निवेशकों को कोई आपत्ति है, वे अपने बैंक खाते का विवरण और लेन-देन का रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय हो सके।

गौरतलब है कि इस मामले में पहले निवेश के नाम पर कथित गबन और धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। वहीं अब आरोपी श्रीधर पाठक ने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखते हुए दावा किया है कि वह निवेशकों का पैसा लौटाने की प्रक्रिया जारी रखे हुए हैं और सभी वैध दावों का निस्तारण करने की मंशा रखते हैं।

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