

राज्यपाल से मिले कॉफ्फेड के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप, मत्स्यजीवियों के हित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सौंपा ज्ञापन
पटना, 11 जून 2026। बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ (कॉफ्फेड) के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप एवं निदेशक सिमरन ने आज बिहार के माननीय राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति जनरल सैयद अता हसनैन से शिष्टाचार मुलाकात कर मत्स्यजीवी समुदाय के हितों से जुड़े दो अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। बिहार के राज्यपाल वर्तमान में विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं।
इस अवसर पर प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने माननीय राज्यपाल को दो विस्तृत ज्ञापन सौंपे। पहला ज्ञापन विश्वविद्यालयों के अधीन स्थित तालाबों, जलकरों एवं जलाशयों की बंदोबस्ती स्थानीय परंपरागत मछुआरों द्वारा गठित प्रखंड स्तरीय मत्स्यजीवी सहयोग समितियों एवं कॉफ्फेड के माध्यम से वार्षिक निर्धारित सुरक्षित जमा राशि पर कराए जाने के संबंध में था। ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान में अनेक विश्वविद्यालयों के अधीन स्थित जलकरों की बंदोबस्ती खुली नीलामी के माध्यम से किए जाने के कारण गरीब एवं परंपरागत मत्स्यजीवी बंदोबस्ती प्राप्त करने में असफल हो जाते हैं, जिससे उनकी आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति प्रभावित होती है। कॉफ्फेड ने राज्यपाल महोदय से अनुरोध किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर स्थानीय मत्स्यजीवी सहयोग समितियों को प्राथमिकता प्रदान की जाए।
दूसरा ज्ञापन विश्वविद्यालयों के नियंत्रणाधीन जलकरों, तालाबों एवं मत्स्य संसाधनों को मत्स्य विभाग, बिहार सरकार के अधीन हस्तांतरित करने से संबंधित था। ज्ञापन में विभिन्न विभागीय आदेशों, न्यायालय के निर्णयों तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि मत्स्य संसाधनों का वैज्ञानिक विकास, उत्पादन वृद्धि एवं मत्स्यजीवियों के कल्याण हेतु इन जलकरों का मत्स्य विभाग के अधीन होना आवश्यक है।
बैठक के दौरान प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने राज्य में मत्स्यजीवियों की वर्तमान स्थिति, सहकारी समितियों की भूमिका, मत्स्य एवं मखाना उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं तथा मत्स्यजीवी परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़े विषयों पर विस्तार से अपना पक्ष रखा।
माननीय राज्यपाल ने दोनों विषयों को गंभीरता से सुना तथा इन पर आवश्यक कार्रवाई एवं सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि मत्स्यजीवियों के कल्याण एवं राज्य के मत्स्य संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़े विषय महत्वपूर्ण हैं तथा प्रस्तुत ज्ञापनों का परीक्षण कर उचित स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने कहा कि यदि विश्वविद्यालयों के अधीन जलकरों की बंदोबस्ती स्थानीय मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के माध्यम से कराई जाती है तथा जलकरों का हस्तांतरण मत्स्य विभाग को किया जाता है, तो इससे लाखों परंपरागत मछुआरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होगी तथा राज्य से मत्स्यजीवियों का पलायन भी कम होगा।
उन्होंने माननीय राज्यपाल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कॉफ्फेड सदैव मत्स्यजीवियों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक उत्थान के लिए कार्य करता रहेगा तथा राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर मत्स्य क्षेत्र के विकास हेतु प्रयासरत रहेगा।
(गोपी कुमार)
मीडिया प्रभारी, कॉफ्फेड
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