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दक्ष गोताखोरों की स्थाई नियुक्ति करे सरकार

संवाददाता सम्मेलन
दक्ष गोताखोरों की स्थाई नियुक्ति करे सरकार: कश्यप
29 अगस्त 2025, पटना। बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने मीन भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य के अनेकों नदियों में प्रति वर्ष मिट्टी कटाव होती रहती है, जिसके कारण उन नदियों के घाटों पर स्नान तथा पूजा-पाठ करना जोखिम भरा रहता है। थोड़ी सी चूक होने से जान चली जाती है। खासकर गंगा, गंडक, बूढ़ी-गंडक, बागमती, जीवछ, कमला, कोसी एवं करेह आदि सदाबहार नदियों में आये दिन डूबकर मौत होती रहती है। अमावश्या एवं पूर्णिमा पर्व के मौके पर भी घटनाएँ घटित होती है।
हमारे राज्य में प्रति वर्ष छठ पूजा, दुर्गा पूजा, बागमती पूजा आदि जैसे अनेक धार्मिक एवं साँस्कृतिक उत्सवों के अवसर पर लाखों श्रद्धालु नदियों में स्नान एवं पूजा-अर्चना करते हैं। इन पवित्र आयोजनों के दौरान दुःखद रुप से कई श्रद्धालुओं के जल में डूबने की घटनाएँ सामने आती रही है। प्रत्येक वर्ष ऐसे हादसों में कई निर्दोष नागरिकों की जान चली जाती है, जिससे समाज में शोक और चिंता का माहौल बन जाता है। बाढ विभिषिका में भी डूबने की इन घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए संघ के द्वारा इस विषय को सरकार के समक्ष समय-समय पर रखा गया है।
वर्त्तमान स्थिति यह है कि इन उत्सवों तथा अन्य अवसरों पर नदियों एवं घाटों पर पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित गोताखोर उपलब्ध नहीं हो पाते हैं। प्रशिक्षित गोताखोरों की कमी के कारण कई बार छोटा-सा हादसा भी बड़ा रुप ले लेता है, क्योंकि दुर्घटना के समय तुरंत बचाव करने वाला कोई विशेषज्ञ मौजूद नहीं होता। अनेक स्थानों पर स्थानीय प्रशासन को सीमित संसाधनों या अप्रशिक्षित स्वयंसेवकों के भरोसे रहना पड़ता है। इस कारण समय पर सहायता न मिलने से डूबने की घटनाएँ प्राणघातक सिद्ध होती है। राज्यभर में पर्याप्त संख्या में कुशल गोताखोरों की नियुक्ति किया जाना नितांत आवश्यक है, ताकि आपात स्थिति में तुरंत बचाव कार्य हो सके और अमूल्य जनजीवन की रक्षा की जा सके। यदि पूरे राज्य में 3800 गोताखोर मछुआरों की स्थायी नियुक्ति की जाती है, तो इसके बहुआयामी लाभ होंगे। राज्य के सभी प्रमुख नदी घाटों और जलाशयों पर प्रशिक्षित बचावकर्मी हर समय उपलब्ध रहेंगे, जिससे डूबने की किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तत्परता से राहत एवं बचाव कार्य किया जा सकेगा और कई जानें बचाई जा सकेंगी। इस कदम से राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन एवं सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। बड़े धार्मिक आयोजन हों या सामान्य समय, हर परिस्थिति में जनता को यह भरोसा रहेगा कि आपातकालीन सहायता तुरंत मिलेगी। इस पहल से मछुआरों तथा गोताखोरों के लिए स्थायी रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। लगभग 3800 परिवारों को इससे सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें आर्थिक स्थिरता प्राप्त होगी। साथ ही जीवनरक्षक कौशलों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा अन्य नागरिक भी प्रेरित होंगे कि वे ऐसा प्रशिक्षण लेकर समाज सेवा में योगदान दें। समग्र रुप से यह निर्णय जनसुरक्षा एवं जनकल्याण की दिशा में एक दूरदर्शी कदम साबित होगा।

कश्यप ने आगे कहा कि संघ के आवेदन पर पूरे राज्य में 3800 प्रशिक्षित गोताखोर मछुआरों की अस्थायी नियुक्ति के संबंध में राज्य के सभी जिला पदाधिकारी को पत्र लिखा गया है। पत्र में यह भी वर्णित है कि विभाग स्तर पर गोताखोर के पद पर स्थायी नियुक्ति करने का नीतिगत निर्णय अब तक नहीं लिया गया है। कॉफ्फेड का मांग है स्थायी नियुक्ति के प्रस्ताव को जल्द से जल्द स्वीकृति प्रदान करने करे राज्य सरकार। क्योंकि बिहार राज्य कल्याणकारी राज्य है। इस निर्णय से राज्य के सभी महत्त्वपूर्ण घाटों एवं नदी तटों पर वर्षभर, विशेषकर पर्व-उत्सवों एवं बाढ़ की विभिषिका के दौरान, पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित हो सकें। हमें पूर्ण आशा है कि राज्य सरकार जनता के बहुमूल्य जीवन की सुरक्षा हेतु इस प्रस्ताव को शीघ्र मंजूरी प्रदान करेगी। राज्य सरकार का यह निर्णय न केवल अनेकों जीवनों की रक्षा करेगा, बल्कि राज्य सरकार की दूरदर्शिता और मानवीय संवेदनशीलता का परिचायक भी होगा।
इस संवाददाता सम्मेलन में प्रमुख गोताखोर राजेन्द्र सहनी, महादेव मुखिया, राम सागर रमन, लाल बहादुर सहनी, हरिओम चक्रवर्ती सहनी, विद्यासागर यादव, प्रकाश कुमार, ललन कुमार, मजरूल हक, निदेशकगण्, मदन कुमार, सुनिल निषाद, सिमरन, रवि राज, दयानंद कुमार, मोनू कुमार, रानी देवी, गोपी कुमार एवं मुनव्वर अली उपस्थित।
(गोपी कुमार)
मीडिया प्रभारी
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