राजनीति में अगर आप धैर्यवान बने रहते हैं तो हिसाब चुकता करने का मौका समय आपको देती है। दीपक प्रकाश

राजनीति में अगर आप धैर्यवान बने रहते हैं तो हिसाब चुकता करने का मौका समय आपको देती है। दीपक प्रकाश भाई का बिना किसी सदन के सदस्य रहे मंत्री बनने के बाद उसको कंटिन्यू न रख पाना RLM चीफ उपेंद्र जी के लिए असहज करने वाली स्थिति है, लेकिन कल के उनके बयान से साफ है कि वह सही समय का इंतजार करेंगे।
अब उम्मीद कम है कि दीपक भाई बिहार सरकार में अपने मंत्री पद को कंटिन्यू कर पायेंगे। बशर्ते कोई नयी राजनीतिक स्थिति न बने। दीपक भाई के लिए संघर्ष का रास्ता खुला है। राजनीति में उनकी सुपर सॉफ्ट लैंडिंग हो चुकी है। पिता की एक राजनीतिक पूंजी साथ है। उनके लिए परिवारवाद के टैग से मुक्त होकर अपनी राह बनाने का एक मौका है।
RLM चीफ उपेंद्र कुशवाहा के लिए बिहार की राजनीति में शतरंज के घोड़े की तरह ढाई कदम पीछे की तरफ अपनी चाल चलने का यह समय है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के समय के महुआ विधानसभा के बदले अपने हिस्से की MLC सीट देने का किया गया अपना वादा फिलहाल तोड़ दिया है। हो सकता है कि इसके बदले उपेंद्र जी को केंद्र सरकार में भाजपा मंत्री बना दे।
इसके बावजूद यदि MLC सीट नहीं देनी थी, तो दोबारा दीपक प्रकाश को मंत्री नहीं बनाना चाहिए था। अगर दीपक प्रकाश को इस्तीफा देना पड़ता है, तो उपेंद्र जी को राजनीतिक तौर पर अपमानित करने जैसा ही कृत्य होगा, साथ में NDA सरकार की भी किरकिरी होगी। फिलहाल, उपेंद्र जी भाजपा की राजनीति के चक्रव्यूह में उलझ गये हैं। क्योंकि, उनके चार में से तीन विधायक भी भीतर से खुश होंगे। दीपक जी के मंत्री बनने का उनलोगों ने दबे स्वर में विरोध किया था। तीनों विधायक धनवान हैं, उनको उपेंद्र जी से अधिक अपने पैसे की ताक़त पर भरोसा है।
ऐसे में उपेंद्र जी कैसे अपनी राजनीति को नयी दिशा देते हैं, वह देखना दिलचस्प होगा। क्योंकि, उपेंद्र कुशवाहा उस नेता का नाम है, जो खुद बनने की शक्ति भले न रखते हों, पर बनाने और बिगाड़ने दोनों की शक्ति तो जरूर रखते हैं।
बाकी त जे है से हइये है! 🏃🏽♂️
– हंसमुख भाई हरचंडी वाले
08/06/2026
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