
पार्टी प्रमुख श्री उमेश सिंह जी ने मिडिया से चर्चा करते हुए कहा कि नेता और सदनों के निर्वाचित सदस्यों में बहुत फर्क है निर्वाचित सदस्य जनता के नौकर होते हैं और नेता जनता का मार्गदर्शक ,निर्वाचित सदस्य लालची स्वार्थी और भ्रष्टाचारी होते हैं और नेता ईमानदार निस्वार्थ राष्ट्रभक्ती के विचारों से ओतप्रोत होते हैं नेता करोड़ो करोड़ में एक पैदा होते है और युगों में और सदस्य हर जगह कुकरमुत्ते की तरह मिल जाएंगे किसी से पुछो की आप हमारी पार्टी से चुनाव लडना चाहेंगे तो सभी तैयार मिलेंगे सिर्फ उनको चुनाव का खर्च दो जिसमें से वो आधा बचा लेंगे और नामचीन दलों से है तो जनता से भी चन्दा उठा लेंगे उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि नहीं है उनके लिए सिर्फ चुनाव जितना सर्वोपरि है उसके लिए वह देश के गद्दारों के दरवाजे पर भी माथा टेक देंगे, उन्हें कुछ आए न आए पर वे कुत्ते से भी ज्यादा वफादार होते अपने दल के मुखिया का वह सदन जाने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा देते हैं और जितने के बाद उसे सुद समेत भ्रष्टाचार के द्वारा वापिस करने में पांचों साल गुजार देते हैं वहीं नेता अपने देश के चौतरफा सुरक्षा और मजबूती के लिए अपने क्षमता के अनुसार स्वाभिमान बचाते हुए संघर्षरत रहते हैं इसलिए निर्वाचित सदस्यों को नेता नहीं कहा जा सकता है वे सभी जनता का नौकर है और नेता जनता का नौकर नहीं मार्गदर्शक होता है, श्री सिंह ने आम जनता से आग्रह किया है कि निर्वाचित सदस्यों को नेता शब्द से सम्बोधन बन्द कर जनसेवक नाम से बुलाए बोले कैसे हैं जन सेवक जी अभी तक आपने हमारा काम नहीं किया काहे देरी है, इससे लोकतंत्र मजबूत होगा,(दिनानाथ पासवान राष्ट्रीय प्रवक्ता)



